2005 के विधानसभा चुनाव में मात्र 12 लाख 498 वोट जुटाने और 9 सीटें हासिल करने के लिए कांग्रेस पार्टी को ढ़ाई करोड़ से ज्यादा रुपए खर्च करने पड़े। यह खर्च पार्टी के प्रदेश कार्यालय द्वारा किये गये। इसमें 41 सीटों पर खड़े प्रत्याशियों के खर्च शामिल नहीं हैं। कांग्रेस पार्टी ने 41 प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने के लिए एक करोड़ 87 लाख रुपए दिये थे। 41 प्रत्याशियों के खर्च की अधिकतम वैधानिक सीमा 15 लाख को ही जोड़ दी जाए तो यह राशि लगभग 9 करोड़ के आसपास आती है। यानी कांग्रेस को एक सीट लाने के लिए लगभग एक करोड रुपये खर्च करने पड़े। 2005 चुनाव में कांग्रेस को कुल मतों का 12.05 फीसदी हिस्सा मिला और केवल 41 सीटों की बात करें तो मतों का प्रतिशत लगभग 22.74 रहा। भाजपा, झामुमो के बाद कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही।
कांग्रेस पार्टी के खर्च के ब्यौरे के मुताबिक पार्टी नेताओं द्वारा चुनाव प्रचार के लिए हेलीकाप्टर तो इस्तेमाल किये गये लेकिन झारखंड के हिस्से में कितना खर्च आया, यह ब्यौरा उपलब्ध नहीं है। बिहार, झारखंड और हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने पवन हंस हेलीकाप्टर और ए.सी. एयरवेज, दिल्ली को क्रमश: एक करोड़ 87 लाख 63 हजार तथा 81 लाख 861 रुपए का भुगतान किया है।
चुनावी चंदे के मामले में कांग्रेस का प्रदर्शन औसत रहा। उपलब्ध ब्यौरे के मुताबिक 2005 विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने और चुनाव खत्म होने तक तक कांग्रेस प्रदेश कार्यालय को मात्र 60 लाख 52 हजार 946 रुपए ही चंदे मिले। चंदा नकद इकट्ठा किये गये और 20 हजार से ज्यादा चंदा देने वालों की संख्या शून्य रही। जन प्रतिनिधित्व कानून के मुताबिक राजनीतिक दलों को 20 हजार से ज्यादा चंदा देने वालों की सूचना चुनाव आयोग तथा आयकर विभाग को उपलब्ध करानी पड़ती है। चेक या डिमांड ड्राफ्ट से चंदा देने या लेने की जहमत नहीं उठायी गयी। इस चंदे में पार्टी प्रत्याशियों द्वारा उगाहे गये चंदे शामिल नहीं हैं।
हिसाब-किताब में कांग्रेस ने नकद-नारायण का ही इस्तेमाल किया। सारे खर्चे कैश में किये गये, न चेक का झंझट और न ही ड्राफ्ट के पचडे। पर्चे, पोस्टर, अखबारों में विज्ञापन, होर्डिंग, कटआउट, बैनर, फ्लैक्स सभी खर्चें का भुगतान विभिन्न एजेंसियों को नकद ही किया गया। प्रचार में कांग्र्रेस ने मात्र 11 लाख 97 हजार 841 रुपए ही खर्च किये। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के खाने-पीने, घूमने-फिरने और मौज-मस्ती का पूरा ख्याल रखा गया। इस मद में पार्टी की ओर से लगभग 22 लाख रुपए खर्च किये गये। हवाई यात्रा से परहेज किया गया और इस मद में मात्र 9218 रुपए खर्च हुए। पार्टी या प्रत्याशियों के शुभचिंतकों को स्वतंत्रता दी गयी थी कि वे चाहें तो हवाई यात्रा कर सकते हैं। चूंकि कांग्रेस पार्टी या किसी राजनीतिक दल के वश में नहीं है कि वे 'अपने चाहने वालों' को चुनाव में खर्च करने से रोके।
पार्टी ने चुनाव बजट का लगभग 15 फीसदी जनसभाओं और रैलियों पर खर्च किया। दोनों कार्यक्रमों के लिए पार्टी ने लगभग 27 लाख रुपए लुटाये। कुल मिलाकर लगभग एक करोड़ में एक सीट, सौदा महंगा है क्या?
(लेखक नेशनल इलेक्शन वॉच के राज्य समन्वयक हैं। )